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अध्यात्म पुरुष योगिराज बाबा बरुआदास जी महाराज की तपस्थली फैजाबाद मण्डल मुख्यालय से 90 किमी. सुदूर पूर्व में अम्बेडकर नगर जनपद के अंतर्गत मालीपुर से जलालपुर मार्ग के किमी. , 06 पर ग्रामीण क्षेत्र में यह महाविद्यालय अवस्थित है | वर्ष 1970 में स्थापित यह महाविद्यालय जनपद का तीसरा सबसे प्राचीन महाविद्यालय है |
स्वामी बाबा बरुआदास जी महाराज की प्रेरणा एवं पुण्य से संस्थापक प्राचार्य स्व. श्री राधेमोहन द्विवेदी के अथक प्रयास के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल महामहिम डॉ. बी. गोपाल रेड्डी ने 01 अप्रैल, 1970 को परुइया आश्रम की धरती पर स्नातक महाविद्यालय खोले जाने की सहर्ष सहमती प्रदान की |
गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर द्वारा जुलाई 1971 में कला संकाय के अंतर्गत हिंदी , संस्कृत, अंग्रेजी, प्राचीन इतिहास, समाजशास्त्र एवं अर्थशास्त्र विषयों के साथ महाविद्यालय को सम्बद्धता प्रदान की गयी | फलस्वरूप 06 शिक्षकों एवं 70 छात्रों की सहभागिता से महाविद्यालय का वर्ष 1971 से सत्रारम्भ हुआ |
वर्ष 1975 में अवध विश्विद्यालय की स्थापना के पश्चात् महाविद्यालय अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से अभिसंबद्ध हुआ | इसी वर्ष 31 मार्च, 1975 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अनुदान सूची पर महाविद्यालय को लिया गया |
उत्तरोत्तर विकास क्रम में वर्ष 1977, में महाविद्यालय को वाणिज्य संकाय की सम्बद्धता अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद द्वारा प्रदान की गयी | वर्ष 1981 में महाविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली द्वारा धारा 2(F) एवं 2(B) में पंजीकृत किया गया | महाविद्यालय का संचालन बाबा बरुआदास शिक्षण संस्थान बरुआ धाम द्वारा किया जाता है | सम्प्रति बरुआधाम के महन्त श्री देवेन्द्र दास जी के संरक्षण में महाविद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है |
यह महाविद्यालय पूज्य बाबा बरुआदास जी महाराज की आधुनिकता एवं प्राचीनता , आध्यत्मिकता एवं भौतिकता के समन्वय के प्रयास के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयोग है | संस्था का मुख्य भवन संस्थापक प्राचार्य स्व. श्री राधे मोहन द्विवेदी के पुरुषार्थ का परिणाम है |
आदर्श वाक्य - संस्था का आदर्श वाक्य है "श्रम , संयम, मितव्ययिता" |